Tuesday, October 4, 2022
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चंद्रकांत पंडित ने रचा इतिहास, लोगों को आई चक दे इंडिया के कबीर की याद

मध्य प्रदेश की टीम आखरी बार वर्ष 1998-99 में रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचीं थी। बता दे की उस समय टीम के कप्तान चंद्रकांत पंडित ही थे। मगर चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में मध्य प्रदेश टीम का रणजी ट्रॉफी जीतने का सपना कर्नाटक की टीम ने तोड़ दिया था। फाइनल मैच में कर्नाटक ने मध्य प्रदेश को 96 रन से हराया था।

इस बार वही चंद्रकांत पंडीत मध्य प्रदेश टीम के कोच हैं। 23 वर्ष पहले कप्तान के रूप मे चंद्रकांत पंडीत का जो सपना अधूरा रह गया था अब कोच के रूप में उसे पूरा किया। मध्य प्रदेश ने रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में 41 बार चैंपियन र्ह चुकी मुंबई की टीम को 6 विकेट से हराकर अपना पहला खिताब जीता है।

कोच चंद्रकांत पंडित सख्त मिजाज माने जाते हैं। यही उनकी सफलता का फॉर्मूला भी है। उन्होंने मध्य प्रदेश का कोच बनने के बाद टीम की तैयारियों में कई बदलाव किए। शुरू में तो खिलाड़ियों को भी यह बदलाव पसंद नहीं आए। मगर जब नतीजे टीम के हक में आने लगे तो फिर सारी बातें पीछे छूट गईं और सब कुछ ठीक हो गया।

बता दे की चंद्रकांत पंडित बतौर कोच छठी बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बने है। आज उनकी गिनती देश के सबसे सफल कोच में होती है। इससे पूर्व भी चंद्रकांत पंडित के कोच रहते विदर्भ की टीम लगातार 2 बार वर्ष 2017-18 और वर्ष 2018-19 में रणजी चैम्पियन बनी थी। विदर्भ से पहले चंद्रकांत पंडीत मुंबई टीम के कोच थे। चंद्रकांत पंडीत की कोचिंग में मुंबई ने भी वर्ष 2016 में रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था।

मैच जितने के बाद कोच चंद्रकांत पंडित ने कहा, यह एक यादगार पल है। 23 वर्ष पहले इसी मैदान पर मुझसे कुछ छूट गया था। भगवान के आशीर्वाद के साथ हम यहां वापस आए। बतौर कप्तान मैं यहां चूक गया था, मगर आदित्य श्रीवास्तव ने यह कर दिखाया है। टीम में बहुत सारे युवा हैं। मैं मध्य प्रदेश में एक क्रिकेट संस्कृति विकसित करना चाहता हूं। मैं मध्य प्रदेश के लिए खेलता था, और इसलिए मुझे वहा की संस्कृति का पता था।

आपको बता दें की चंद्रकांत पंडित के इस इतिहास ने लोगों को चक दे इंडिया फिल्म के शाहरुख खान की याद दिलाई हैं.

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